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Manoj Kumar

Romance Inspirational Thriller

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Manoj Kumar

Romance Inspirational Thriller

महलों वाली

महलों वाली

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देखती रही झांक- झांक कर खिड़कियों से वो,

तब मेरी नजर गई उसपर।

वो मुस्कराई जैसे पंक में पंकज खिल रहा हो,

सुबह के बेला में।

मै रुक गया अंदाज देख कर, खुद आकर्षित ,

हो गया उस पर।


खूबसूरत है वो मृगनयनी , काले जुल्फ़े गिरा के इशारा करती हैं।

मुखड़ा पूर्णिमा के चांद जैसा,

कभी देखती है झुककर नजर से।

कभी आंखो से गुलेल चलाती हैं।

वो बलखाती है, शर्माती है प्रातः कलियों के जैसा।


उसकी चाल पूछो न हमसे, मखमली चादर जैसी लहराती है।

बदन पर चमक लब पर प्यार बरसाती है।

ठहर जाए एक ही जगह पर,

उसको भी चाह है, उसको पाने को।

पर क्या करें वो खुद शर्माती है।


गुज़रे कोई भी अजनबी एक ही रास्ते पर क्यों न हो।

पर वो हमे मिली पहली नज़र में महलों वाली।

अब वो फैसला कौन कर सकता है।

दोनों का बनने वाली।

जो बनाते जोड़ी वहीं है रख वाला

वहीं लाएगा महलों वाली।


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