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Amit Singhal "Aseemit"

Abstract Drama

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Amit Singhal "Aseemit"

Abstract Drama

माँ दुर्गा

माँ दुर्गा

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पाताल लोक पर एक असुर ने अधिकार था जमाया।

उस असुर ने भैंसे अर्थात महिष जैसा मुख था पाया।


महिषासुर ने घोर तपस्या कर स्त्री से वध का वर पाया।

वरदान मिलने के बाद महिषासुर में दंभ था भर आया।


निरंकुश हो कर वह स्वर्ग पर अधिकार जमाने आया।

स्वर्ग में सभी देवताओं के मन भय ने डेरा था जमाया।


देवताओं ने त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु, महेश को सब बताया।

सब देवताओं ने महिषासुर से युद्ध का मन बनाया।


युद्ध में महिषासुर से सब देवताओं ने अपमान पाया।

युद्ध में महिषासुर से हारकर देवताओं को क्रोध आया।


देवताओं ने मिलकर अपनी शक्ति से स्त्री रूप बनाया।

शक्ति के स्त्री रूप को माता दुर्गा के नाम से बुलाया।


सिंह पर सवार माता दुर्गा को देवताओं ने सब बताया।

देवताओं ने उनके निर्माण के उद्देश्य से अवगत कराया।


यह सब जानकर माता दुर्गा को बहुत क्रोध था आया।

मां दुर्गा को महिषासुर की शक्तियों से अवगत कराया।


उनको महिषासुर को मिले अनोखे वरदान का बताया।

तब दुर्गा ने वीरता से राक्षस के वध का बीड़ा उठाया।


देवताओं में माँ शक्ति का आह्वान करके हर्ष था छाया।

क्योंकि अब उनको लगा कि महिषासुर का अंत आया।


दुर्गा वाहन सिंह पर बैठ अपने मार्ग पर पैर बढ़ाया।

महिषासुर को दुर्गा ने युद्ध हेतु ललकार कर बुलाया।


महिषासुर ने दुर्गा को देखकर ज़ोर से अट्टहास लगाया।

दुर्गा ने यह सब देखकर क्रोध से रौद्र रूप अपनाया।


दुर्गा और महिषासुर के युद्ध ने भयंकर रूप अपनाया।

निरंतर नौ दिनों तक दोनों के मध्य युद्ध बढ़ता आया।


दसवें दिन क्रोध में दुर्गा ने अत्यंत रौद्र रूप दिखाया।

महिषासुर पर रौद्र रूपी माँ ने त्रिशूल से वार चलाया।


त्रिशूल सीधे जाकर महिषासुर की छाती में गहराया।

महिषासुर की छाती से रक्तधारा बनकर बाहर आया।


देवताओं ने राक्षस महिषासुर से छुटकारा पाया।

सबने मिलकर दुर्गा की जयकार का नारा लगाया।


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