STORYMIRROR

Sudhir Srivastava

Abstract

4  

Sudhir Srivastava

Abstract

जीवन इच्छा

जीवन इच्छा

1 min
11

जीवन सहज बन जाए सभी का

हर मन में इतनी पवित्रता हो,

दूर रहें सब लोभ मोह से

हर जन के जीवन की शिक्षा हो।


मद सिर पर न चढ़े कभी

कामी, पापी न कोई हो,

निंदा नफ़रत क्रोध से 

हर जन कोसों दूर हो।


रामनाम रस पीने की 

हर मन की सदइच्छा हो

हर मन मंदिर में हरि सुमिरन गूंजित, 

दुनिया का ऐसा वातावरण हो।


मंदिर मस्जिद और धर्म जाति का

जन मन में न क्लेश हो,

प्रभु चरणों में शरणागत होकर कर

हर जन के जीवन की इच्छा हो। 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract