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Sudhir Srivastava

Abstract

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Sudhir Srivastava

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चौपाई छंद - माता

चौपाई छंद - माता

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चौपाई - माता  ********** हम सबकी है जीवन दाता। कहें आप हम जिसको माता।। पालन पोषण भी वो करती। ममता आँचल अपना धरती।। रातों  दिन  वो  खटती  रहती। फिर भी कभी कहाँ वो थकती।। ईश्वर  की  अनमोल  धरोहर। होती कब वो भला सहोदर।। आज समय का खेल निराला। हम सबका होता मुँह काला।। नित माँ का अपमान करें हम। जिसका हमको ना कोई ग़म।। माँ का फटता आज कलेजा। तड़प  रहा है उसका  भेजा।। हम सब  माँ को रुला  रहे हैं। पाप शीश निज चढ़ा रहे हैं।। माँ की आहें भले मौन हैं। हम भूलें वो भला कौन हैं।। आखिर इसका दंड भी पाते। अपने  बच्चे  मारें  लातें ।। सुधीर श्रीवास्तव  


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