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Sudhir Srivastava

Abstract

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Sudhir Srivastava

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जयकरी छंद - माँ की ममता

जयकरी छंद - माँ की ममता

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जयकरी छंद माँ की ममता  ********* माँ की ममता बड़ी अपार। मान रहे हम सब आधार।। कौन  हुआ  इससे  उद्धार। करते  रहिए माँ से  प्यार।। प्राणी जीवन  का ये  सार। इनसे मिलता प्यार दुलार।। माँ का  खोता  है  सम्मान। लोग  बने  मूरख  अंजान।। माता   झेल   रही   है   दंश। पीछे  इसके  अपना  अंश।। माँ  को  होता  भीषण  दर्द। पता चले कब चुभती सर्द।। माँ   का  ये  कैसा   दुर्भाग्य। अपने करते उसका त्याग्य।। ये  कैसा   हम   करते   पाप। नाहक   है सब  पूजा  जाप।। अब अपने में  करो सुधार। वरना  निश्चित है बँटाधार।। माँ की ममता  नहीं उधार। करते रहिए माँ को प्यार।। सुधीर श्रीवास्तव  


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