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Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

"महाराणा प्रताप"

"महाराणा प्रताप"

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वंदन, नमन करते उन महाराणा प्रताप को

जिन्होंने हिलाकर रख दिया, आसमान को

जिस अकबर ने जीत लिया हिंदुस्तान को

वो झुका नही सका मेवाड़ी अभिमान को


प्रातःस्मरण करते है, महाराणा प्रताप को

जैसे ईश वंदना करते, हम प्रातःकाल को

वंदन, नमन करते, उन महाराणा प्रताप को

कोई न डिगा सका, उनके स्वाभिमान को


मत पूंछो, तुम उनकी वीरता की बात को

काट दिया, अश्व सहित बहलोल खान को

भले वो हारे, हल्दीघाटी के युद्ध मैदान को

खूब नुकसान पहुंचाया, मुगल जानमाल को


चेतक ने पार किया, वीरता के निशान को

जान दे दी, पर झुकने न दे, मेवाड़ी आन को

घास रोटी खाई, पर न छोड़ा स्वाभिमान को

अंतत:जीत लिया चितोड़ छोड़, पूरे मेवाड़ को


धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाते वक्त, एक शाम को

दुर्भाग्य से चोट खा गिर पड़े थे, उस शाम को

तब अकबर भी रोया, फूट-फूट उस शाम को

जब महाराणा प्रताप न रहे थे, उस शाम को


वंदन, नमन करते, मां भारती के उस लाल को

जिन्होंने हिलाकर रख दिया था, आसमान को



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