महारानी येसूबाई
महारानी येसूबाई
छत्रपति शिवाजी की जेष्ठ पुत्रवधू की शान,
सरदार पिलाजी शिरके की कन्या येसू महान।
छत्रपति शिवाजी की जेष्ठ पुत्र संभाजी संग,
महारानी येसूबाई का हुआ बाल विवाह संपन्न।
बाल संभाजी का छत्रपति शिवाजी के संग,
औरंगजेब के जन्मदिन पर आगरा आगमन।
औरंगजेब ने शिवाजी का किया भरे दरबार में अपमान,
ना देकर राजा का सम्मान, दरबार में उचित स्थान।
ना मिलने पर उचित स्थान और राजन का सम्मान,
छत्रपति शिवाजी हुये बादशाह पर भरे दरबार में खिन्न।
छत्रपति शिवाजी ने किया उग्र रुप धारण,
जहांपनाह और दरबारी देखकर रहे गये दंग।
छत्रपति शिवाजी और संभाजी हुये नजरबंद,
शिवाजी और संभाजी ने चलाया आगरा रिहाई अभियान।
संभाजी को किया मृत घोषित आगरा निकासी के दौरान,
महारानी येसूबाई ने बचपन में किये शुभ्र वस्त्र धारण।
कुछ अरसे बाद संभाजी का हुआ रायगढ़ में आगमन,
महारानी येसूबाई को मिला खोया सौभाग्य दान।
येसूबाई की देखकर चतुराई, सहनशीलता व चैतन्य,
शिवाजी ने किया साम्राज्य कुलमुकत्यार के लिए चयन।
महाराज के दक्षिण दिग्विजय अभियान के दौरान,
संभाजी ने किया मुगल छावनी में पलायन।
येसू बाई ने संभाली रायगढ़ की कमान,
अपने सुझ-बुझ से षड्यंत्रकारियों पर रखा नियंत्रण।
शिवाजी के निर्णय का रखा सम्मान,
रायगढ़ से साम्राज्य का चलाकर सुशासन।
भ्राता गनो जी का किया निरस्त वतन अभियान,
शिवाजी के साम्राज्य में रहेगा एक ही राजन।
मायके के असहयोग अभियान के कारण,
संभाजी राजे को किया मुगलों ने नजरबंद।
येसूबाई के सफल नहीं हुये मुगलों पर आक्रमण,
मृत्युदंड देकर औरंगजेब ने लिए संभाजी के प्राण।
संभाजी के अनुज राजाराम को किया सिंहासनासीन,
मराठा साम्राज्य के लिए राजाराम का रायगढ़ से प्रस्थान।
मुगलों ने येसूबाई , बाल शाहू को किया नजरबंद,
मराठा साम्राज्य की बचाई येसू ने आन बान और शान।
येसूबाई के कार्य को भी मिला इतिहास में ऊंचा स्थान,
मराठों का इतिहास रहेगा अधूरा बिना येसू के गुणगान।
