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Ganesh Chandra kestwal

Inspirational

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Ganesh Chandra kestwal

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महाकाल

महाकाल

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अनघ शंकर ध्यान सभी करें।

छवि महेश्वर की उर में धरे।

प्रिय महेश शिवेश जपा करें।

शिव सभी जन के अघ को हरें॥१॥ 


 विष हलाहल है शिव ने पिया।

 अभयदान सुरासुर को दिया।

 वह हलाहल कंठ बना रहा।

 सुभग नील सुकंठ उसे कहा॥२॥ 


शिवप्रिया मख देखन को चली।

भव उपेक्षित थे तन से जली।

सुन विनाश शिवा मख में हुई।

मख विनाशक शक्ति वहाँ गई॥३॥


 जगत रक्षक काल महा बने। 

 सुर सभी तहँ से चलते बने।

 शिव भयंकर रक्षक नित्य हों।

 जगत ईश्वर शंकर सत्य हों॥४॥


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