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Manju Umare

Inspirational

4  

Manju Umare

Inspirational

मेरी मां...

मेरी मां...

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जब भी तकलीफ़ होती है मुझे,

एक तेरा ही नाम याद आता है

वो तेरी आंखें ही होती है मां ,

जिसमें स्नेह की निश्चल धारा बहती है

तारीखों में प्यार जताते हैं जहां सब ही

वो मेरी मां जब चाहे प्यार से

मेरा माथा चूम लिया करती है

एक उनका प्यार मोहताज न किसी पल का

सर रख के गोद में अपने वो

मेरे गुनाह माफ कर दिया करती है

कोई रिश्ता नहीं इतना पाक और निश्छल

वो मेरी मां बिना किसी मतलब के 

मुझसे सबसे ज्यादा प्यार करती है

कभी मिलावट न देखी प्यार में उनके

न चेहरे पर देखी कभी कोई थकावट

ममता लुटाकर अपनी मेरी दुनिया संवारा करती है

फ़र्क नहीं पड़ता उन्हें कि ये दुनिया

मुझे कैसे देखती है और क्या समझती है

मेरी मां मुझे अपनी प्यारी बेटी हमेशा कहा करती है

कभी नाराज़ हो जाऊं तो प्यार से मनाती वो

मुझे डांटकर देखा है ‌मैंनै वो अक्सर अकेले में रोती है

खुद को संवारने की फुर्सत ही कहां उनको

मेरी मां मेरी तक़दीर संवारने में

सब कुछ भूल जाया करती है

कोई तजुर्बा किसी हकीम के पास कहां ऐसा

मेरा चेहरा देखकर जो मेरी तबियत जान लेती हैं

कोई दवा न असर करें तो नज़र उतारने लगती वो,

मेरी मां है वो साहब वो कहां हार मानती हैं

काम से थककर चूर हो नींद से बोझिल आंखें फिर भी

जब तक सो न जाऊं मैं वो फिक्रमंद होकर जागती है

हर सपना मुझ ही में जीया है हरपल उन्होंने

वो मेरी मां मुझे अपना गुऱूर कहा करती हैं

हज़ारों गम होते हैं मुझे लेकिन 

मैं उस पल खुश हो जाया करती हूं

वो पल जिसमें मेरी मां 

दिल से खुश होकर हंसती हैं.....



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