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SMRITI SHIKHHA

Inspirational

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SMRITI SHIKHHA

Inspirational

मेरी मां मेरी जन्नत हैं ।

मेरी मां मेरी जन्नत हैं ।

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मेरी मां जिन्होंने दिया है मुझे जन्म रख कर मुझे अपने कोक में नौ महीने

और पाल पोस कर दिया उन्होंने मुझे जन्म जो की होता बड़ा ही मुश्किल समय है हर गर्भवती मां के लिए 

फिर भी बिना दिखाए वो दर्द अपना कष्ट अपना पीड़ा सहती वो हर दुख हैं 

जताती नहीं वो किसी को की हैं वो कितने कष्ट में महसूस कितना दर्द वो रही थी तब कर  

रहती वो हमेशा चुप चाप हैं करती नहीं वो अपनी दिल का हाल किसी से बयां

फिर भी जताती ऐसी जैसे वो है दुनिया में सबसे ज़्यादा खुश ।


होते वो सारे बच्चे बड़े किस्मत वाले जिनकी होती मां हैं क्यों की कोई और हो ना हो 

अगर मां है तो चाहे जो मुश्किल जितनी बड़ी मुश्किल चाहे जैसे भी हो हालात

जैसी मेरी मां हैं जो बचाते मेरी जान हैं जब होती मैं मुश्किल में हूं ना परवाह किए अपने 


वो इंसान मां ही हैं जो किसी भी परिस्थिति में किसी भी समय में किसी भी कारणवश छोड़ेंगी नहीं तुम्हारे हाथ 

चाहे जितने भी कर लो अपना हौसले बुलंद आते कुछ ऐसे अवसर कुछ ऐसे मौके तब भी होती मेरी मां खड़ी मेरे पास 

जो हिला देती तुम्हें पूरा सर से ले के पैर तक डगमगा देती तुम्हारे हौसले और हटा देती है

तुम्हारा खुद पर पे भरोसा तब वो मां ही होती है तुम्हारी जो दिलाती है दिलासा बनती वो तुम्हारी हिम्मत है ।


मां होती है हमारी जिंदगी में सक्ष ऐसी जो बनती है कई सारे हालातों में कई परिस्थितियों में हमारा आईना 

जो बताती है हमें सही और गलत में फर्क जो बताती है हमारे गलतियों को दिखाती है हमारे लिए गलत फैसलों को 

हमारी मां होती हमारे लिए जन्नत के समान है जो होता इस धरती के पार है जिससे जीवित रहते तक देख नहीं पाते कोई 

और जो देखते हैं जा कर उस पार नहीं वो हमको बता पाते मगर मैं कहूंगी की हूं मैं वो खुशकिस्मत इंसान जिसने है देखा 


होते इस धरती पर रेहे कर यहां पर जिंदा मैंने है देखा जन्नत महसूस है किया उनका छाव रेहे हर मां के साथ और रख कर उनके गोद में अपना सर देख लिया मैंने जिंदा रह कर पूरी जन्नत ।



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