STORYMIRROR

Sneha Srivastava

Abstract

4  

Sneha Srivastava

Abstract

मेरी डायरी के पन्ने

मेरी डायरी के पन्ने

1 min
489

आज जब खुले मेरी डायरी के पन्ने

तो बात मेरी सबसे पसंदीदा रचना की होने लगी

मैं चुप रही और असहज होने लगी

कैसे कह दूँ की कौन सी रचना सबसे अच्छी थी

मेरे लिए तो सभी मेरी प्यारी बच्ची थीं

आज जब खुले मेरी डायरी के पन्ने।

लोगों ने मेरे बच्चों में से एक, दो होनहार चुन डाले

बात ये सुनकर मैं भावविहीन होने लगी

कौन कितना लोकप्रिय ये तय सभी करने लगे

मैं थी असहज इस स्थिति से, असहज ही बनी रही

आज जब खुले मेरी डायरी के पन्ने।

अधिकार है लोगों को मूल्यांकन का

मेरे लिए ये मूल्यांकन से परे विषय था

थीं निकट सभी ह्रदय के, क्योंकि प्रयास और प्रेम सबमें अथक था

आज जब बंटे ये, कौन किससे बेहतर के पैमानों पर

तब नज़रों का फेर समझ आया

आज जब खुले मेरी डायरी के पन्ने।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract