STORYMIRROR

Divyanjli Verma

Inspirational

4  

Divyanjli Verma

Inspirational

मेरी अन्तरात्मा मेरी प्रेरणा

मेरी अन्तरात्मा मेरी प्रेरणा

1 min
313


मेरे गुरु, मेरे शिक्षक, मेरे प्रेरणा स्रोत,

मैं खुद हू मेरी जिंदगी की मार्गदर्शक।

मेरी अन्तरात्मा है ऊर्जाओं का भंडार,

जो समय समय पर दिखती रहती है एक अलग ही संसार।

जहा खेलती है एक छोटी सी लड़की,

जिसके दिल से आती है ओम की आवाज,

कोई नहीं है एसा प्रेरणादायक स्रोत।

मैं खुद हू मेरे जीवन का मार्गदर्शक।

मैं खुद हू मेरी प्रेरणा का स्रोत।

स्वयं से बड़ा कोई शिक्षक नहीं,

खुद ही खुद को समझाना पड़ता है। 

दूसरे बस बताते है तरीके,

करने का ज़ज्बा खुद ही जगाना पड़ता है।

मेरी अन्तरात्मा है मेरी प्रेरणा का स्रोत, 

खुद ही खुद को खुद का गुरु बनाना पड़ता है।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational