Swapnil Saurav
Comedy Drama
aaaaaaaaaaaaaaaa
यादें
१५ साल के बाद...
शिद्दत
मेरी चाहत
एक हसीन मुलाक...
नए ज़माने का फ...
दोस्त की शादी...
यमराज से वार्...
चाची की बीमार...
मेरी ज़िन्दगी ...
ये तुम्हारी या मेरी नहीं अपनी, है ये कहानी घर-घर की। ये तुम्हारी या मेरी नहीं अपनी, है ये कहानी घर-घर की।
वर्षा का स्वागत-- गीत अब के बरस भी ना उठ पाऐगी...... बिटिया की डोली ।कर्ज़ पाटने में गुज़रेगी ; ईद---... वर्षा का स्वागत-- गीत अब के बरस भी ना उठ पाऐगी...... बिटिया की डोली ।कर्ज़ पाटने...
रचनात्मक आन्दोलन चलानेवाले कविगण चिल्लाये/ चीखे रचनात्मक आन्दोलन चलानेवाले कविगण चिल्लाय...
वो मेहनत के दिन वो मीठी झिड़कियों के दिन हर किसी को याद आते हैं वो पुराने दिन। वो मेहनत के दिन वो मीठी झिड़कियों के दिन हर किसी को याद आते हैं वो पुराने दिन...
आखिरकार मैंने, कुछ शब्दो को धरदबोचा, और छंदों की गांठ मारी और किस्सों को पोटली में खोसा. मैंने इन स... आखिरकार मैंने, कुछ शब्दो को धरदबोचा, और छंदों की गांठ मारी और किस्सों को पोटली ...
कल रात पूजा पंडाल मेंं अजीब बात हो गई। कल रात पूजा पंडाल मेंं अजीब बात हो गई।
बेशक मुझमें बदबू है, पर जो भी अपनाया उसे ये जिस्म भाया है बेशक मुझमें बदबू है, पर जो भी अपनाया उसे ये जिस्म भाया है
नेताजी की शेरवानी के बटन होल में नेताजी की शेरवानी के बटन होल में
तुम जिसे अपनी सफलता कहते हो और जिसका बखान करते थकते नहीं हो दरअसल वह तुम्हारा बेरंग और निष्ठुर होना ... तुम जिसे अपनी सफलता कहते हो और जिसका बखान करते थकते नहीं हो दरअसल वह तुम्हारा बे...
चलती का नाम गाड़ी बढ़ती का नाम दाढ़ी जो न रखे अनाड़ी चलती का नाम गाड़ी बढ़ती का नाम दाढ़ी जो न रखे अनाड़ी
एक भाई का अपनी बहन से निवेदन की वो उसे इस बार राखी न बांधे. क्योंकि वो अपने भाई होने का फर्ज ठीक से ... एक भाई का अपनी बहन से निवेदन की वो उसे इस बार राखी न बांधे. क्योंकि वो अपने भाई ...
क्या होती है गरीबी? क्या करती है ये गरीबी? क्या होती है गरीबी? क्या करती है ये गरीबी?
आजकल सांसें ठीक से ले रहे हो ना, जिंदा तो हो ना वो क्या है ना तुम कहते थे सांसों से ज्यादा जरूरत ... आजकल सांसें ठीक से ले रहे हो ना, जिंदा तो हो ना वो क्या है ना तुम कहते थे सां...
प्रभु! क्षमा चाहता हूं आना तो मैं दिन में ही चाहता था, प्रभु! क्षमा चाहता हूं आना तो मैं दिन में ही चाहता था,
हुस्न का दीदार होते ही हमारी कमबख्त आंखें दगा दे जाती हैं. हुस्न का दीदार होते ही हमारी कमबख्त आंखें दगा दे जाती हैं.
वरना सुनना पड़े, वो मंजवाती है बरतन, आप पैर दबवाओगे। वरना सुनना पड़े, वो मंजवाती है बरतन, आप पैर दबवाओगे।
कविता मानव मन के समसामयिक द्वंदों पर आधारित है जिसमें कवि अपने अंतर्मन के भावनाओं और संलापों को अपने... कविता मानव मन के समसामयिक द्वंदों पर आधारित है जिसमें कवि अपने अंतर्मन के भावनाओ...
और मुझे करे बदनाम,नाम... मैं देती इसको प्यार-प्यार,ये देतीं हैं मुझे कष्ट कष्ट। और मुझे करे बदनाम,नाम... मैं देती इसको प्यार-प्यार,ये देतीं हैं मुझे कष्ट कष्...
एक दिन मामला ऐसा बिगड़ा कि पड़ोसी पड़ोसन का हो गया आपसी झगड़ा। एक दिन मामला ऐसा बिगड़ा कि पड़ोसी पड़ोसन का हो गया आपसी झगड़ा।
साले साली की महिमा ऐसी, मरू में हरे सरोवर जैसी । घर पे होते जो मेहमान , नित मिलते मेवा प... साले साली की महिमा ऐसी, मरू में हरे सरोवर जैसी । घर पे होते जो मेहमान , ...