STORYMIRROR

Deepali Mathane

Fantasy

3  

Deepali Mathane

Fantasy

मेरे कान्हा....

मेरे कान्हा....

1 min
179

वासुदेव निकले लेकर टोकरी भरी हुई जो कृष्णा से

आजीवन की मिट जायें प्यास ऐसी प्यासी मृग तृष्णा से


रात काली अँधियारी भिंग रही थी सावन की बौछारों से

सो रहा था जीवन सारा जब निकले कान्हा मथुरा की गलियारों से


जन्म होते ही छूट गयें माँ-बाबा हाथ की लकीरों से

ऐसा जीवन पाया कान्हा लड़ते रहे ताक़तवर दीवारों से


माँ यशोदा के लाडले सजायें जीवन संगीत बहारों से

माखन-मिश्री अति प्रिय तुम्हें जो लाख चुरायें गोपियों से


यमुनाजी के तट पे तुमने रास रचायी छेड़े साज बाँसुरी से

मुखकमलों पे मंदस्मित सदा वृंदावन की सहज माधुरी से



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Fantasy