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Manjula Dusi

Tragedy

4  

Manjula Dusi

Tragedy

मेरे अजन्मे

मेरे अजन्मे

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कुछ बदलाव

अपने भीतर महसूस हुआ था

पहली बार स्वयं को पूर्ण

महसूस किया था

हर पल ख़ुद को

तुमसे जुडा पाती थी

जैसे मेरी हर साँस 

बस तेरे लिए ही

आती थी

ऊन के गोलो

संग बुनती थी सपने

तेरे साथ होने से

जीवन में थी नई उमंगें

पल पल था बस तेरे 

आने का इंतजार

तभी ईश्वर ने किया

सबसे क्रूरतम प्रहार

जाने क्यों तू हमसे

रूठ गया

तेरे संग मेरा हर सपना टूट गया

तुझसे बिछडने की पीडा

जीवनपर्यंत सताएगी

मेरे अजन्मे बच्चे तेरी कमी

कभी न पूरी हो पाएगी...



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