STORYMIRROR

Manjula Dusi

Others

3  

Manjula Dusi

Others

होली

होली

1 min
250

हवा बसंती हो गई 

बिखर गए है रंग

बिना पिए ही लग रहा

चढ़ा हो जैसे भंग।।


फूलों से सुरभित हुई

टेसू की हर डाल

प्रियतम आया देखकर

भए गुलाबी गाल।।


भिन्न भिन्न रँग में रँगे

जन मानस चहुँ ओर

होली नें है कर दिया

सबको भाव विभोर।। 


भूल गए हैं बैर सब

मिले हों जैसे रंग

सदा सदा ही बन रहे

आप सभी का संग।।



Rate this content
Log in