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Manjula Dusi

Others

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Manjula Dusi

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होली

होली

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हवा बसंती हो गई 

बिखर गए है रंग

बिना पिए ही लग रहा

चढ़ा हो जैसे भंग।।


फूलों से सुरभित हुई

टेसू की हर डाल

प्रियतम आया देखकर

भए गुलाबी गाल।।


भिन्न भिन्न रँग में रँगे

जन मानस चहुँ ओर

होली नें है कर दिया

सबको भाव विभोर।। 


भूल गए हैं बैर सब

मिले हों जैसे रंग

सदा सदा ही बन रहे

आप सभी का संग।।



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