मेरा सपना
मेरा सपना
रात मेरे सपने में आई, एक सुंदर राजकुमारी।
घण्टों बैठ बतियाए उससे, बातें प्यारी प्यारी।।
बातों ही बातों में उसने, मुझको जीत लिया था।
मुझको ऐसा लगा, कि मेरा मनमीत मिला था।।
उसकी गोदी में सर रख कर, मैं देख रहा था सपना।
दुनिया की इस भीड़ में जैसे, पास था कोई अपना।।
हाथ लिए हाथों में उसका, मैं तो घूम रहा था।
इतनी बम्पर खुशी देखकर, मैं तो झूम रहा था।।
उसकी बलखाती ज़ुल्फ़ों से, मैं तो खेल रहा था।
लेकिन उसकी बिंदिया से, मैं अनमेल रहा था।।
उसका धीरे से यूँ शर्माना, मुझको खूब ही भाया।
इतना ख्याली पुलाव बनाकर, खुद मैंने ही खाया।।
तभी नींद से उठने का, दिया किसी ने जोर।
हमने भी इस बात को बिल्कुल, कर दिया इग्नोर।।
फिर जोर से "अजी सुनते हो" की आवाज़ सुनाई दी।
आँख खुली तो सामने मेरी, बीवी खड़ी दिखाई दी।।
खड़ी देख कर बीवी को, मैं तो हो गया दंग।
मेरा गुलाबी सपना भी, अब हो चुका था भंग।।
फिर मैंने झटपट सपने को, दिया थोड़ा स्पेस।
राजकुमारी से बीवी को, किया तुरंत रिप्लेस।।
सपने में जो कुछ देखा मैंने, वो सब उनसे कह डाला।
मैंने देखा केवल तुमको, यह उनको समझा डाला।।
मैंने कहा प्रिये तुम्ही हो, जग में सबसे से न्यारी।
तुम ही मेरी चन्द्रमुखी हो, और तुम ही राजकुमारी।।