STORYMIRROR

priyanka shaw

Abstract

4  

priyanka shaw

Abstract

मेरा श्रृंगार उन्ही के नाम

मेरा श्रृंगार उन्ही के नाम

1 min
596

मेरे पूरे शरीर पर सोलह श्रृंगार 

उन्हीं की नाम की सजती है, 

मेरी दुनिया तो 

उन्ही की दुनिया मे बस्ती है। 


सिंदूर मेरे माँग मे सजती है, 

उम्र उनका बढ़ाती है। 

बिंदिया मेरे माथे पर लगी, 

चेहरा उनका खिलाती है। 


होठों पर लाली मेरी लगी, 

मुस्कान उनके लबों पर आती है, 

जो कंगन हाथों मेरे खनके, 

दिल उनका धड़क-सी जाती है।


मेहंदी मेरी हाथों मे लगी, 

नाम सजना का रचाती है। 

*गहरा रंग हो मेरी मेहंदी का 

पर प्यार उन्ही का कहलाती है।


मेरे बालों मे लगे गजरे 

घर उनका महकाती है, 

मेरे पैरों की पायल, 

उनके घर को छनकाती है। 


और इन सबके स्थान पर

मैं उनसे चाहती हूँ तो बस 

थोड़ा सा प्यार, थोड़ा सा आदर

और थोड़ा सा सम्मान। 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract