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sargam Bhatt

Abstract

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sargam Bhatt

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मेरा नाम होता

मेरा नाम होता

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खुद को पहचानना मुश्किल नहीं होता,

अगर मेरा भी कोई वजूद होता।

अगर मिलती आजादी तो मैं पहचान बनाती,

आज मेरा भी कोई नाम होता।

चर्चा होती मेरी भी जोरों शोरों से,

मेरे नाम को भी खूब सम्मान मिलता।

क्या मिला उन्हें मुझे कैद करने से,

नहीं आगाज का खूबसूरत अंजाम होता।

जब आगाज़ नहीं हुआ तो अंजाम क्या सोचूं,

मुस्कुराती सुबह और सुहाना शाम होता।

मेरे चाहने वालों की तादाद हजारों होती,

चुटकियों में हल मेरा सारा काम होता।

पैसा भी क्या दमदार चीज है,

पैसे से इज्जत सरेआम होता।

पोस्ट मिलती मुझे भी कोई अधिकारी की,

दुनिया का हर शख्स मेरा मेहमान होता।



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