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Abhishu sharma

Inspirational

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Abhishu sharma

Inspirational

मेरा दिन

मेरा दिन

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नन्हे हाथों की नादान मुलायम कलाइयों में

धधकती दमकती यह चमकती मशाल का प्रतिबिम्ब लिए

निर्भीक खड़ा मैं पल,

 उस आने वाले कल की उम्मीद का सेहरा सिर के

किनारे पर बंधा ,मैं अड़ा 

 बीच समुंदर में तूफानों के मध्य ,

चक्रव्यूह में निहत्था अभिमन्यु, कपटी कौरव वो बंध्या असाध्य

घिरा वह पुष्पों सुमन की कश्ती में  

 गिरा मैं अमन का आराध्य, की 

बनूँ मैं भी सौभाग्यशाली , 

पावन पवन कानों से होते ,मेरे भी अखर कमर को छूकर

ज़िन्दगी की डगर में आते जाते ये मुसाफिरों का डेरा उच्च स्तर

 

आवागमन का हाथ ,

 जनम मरण का साथ थामे ये हमराही ,की

 भीड़ में दूर होते जाते मेरे पीर ,

 मेरी पीड़ा को पीठ दिखा

कभी बहुत दूर ,अब और अधिक नज़दीक आते 

नए दिन की नयी शुरुआत की आशा की आस लिए

उम्मीद की किरण से मन आंगन संजोए 

तेज़ हवाओं से लड़ती -झगड़ती खुशियों की लौ किये

ये हर्ष की लहर मेरी रगों में अब घुलती

मेरे जन्नत की बगिया में मासूम उल्लास का उन्माद ,

उसका रस तरुण कलियों में भरे

पूछे !

 क्यों इस भयावह भ्रमित बवंडर का बन बंदर 

एक बार फिर इन मदारियों के इशारों पर नाचूँ , 

क्यों खींचूँ मस्तक पर ये चिंता की लकीरे ,ओ मेरे फकीरे!

आनंद से एक सीधे साधे से सौदे में

सदा मुस्काने के किये वादे के दावे में

फर्श पर अटकी ज़िन्दगी को स्वछंद हवा के पंख  लगे 

अर्श की ऊंचाइयों से मिला ,अब 

"अल्ल गाड़ी" मंत्र याद करो , पाठ करो ,

जाप करो खुद से , खुदा से ये फ़रियाद करो

सच झूठ के इस मायाजाल में,

हर युग के इस महायुद्ध में

आस्था की ढाल ले, प्रेम की कटार पकड़

चिंता को चिता बना , ख़ाक में मिला

अपने भीतर के भीत को भेद

कंधो हो अँधा ढोता यह मृषा बोझ यह मिथ्या भार ,

नकारात्मकता की सड़क पर दौड़ते

ना जाने कब थम सी गयी यह ज़िन्दगी की रफ़्तार, की

 

 भर फिर रमा ये सुकर्मा का ईंधन

अगल -बगल से अदल -बदल के

बिखरे दुखों को तोड़ मरोड़ के

उन अधूरे ,भूले बिसरे सपनों को खुद से मिलाने

अंदर की आग को फिर एक बार सुलगाने

धुएं को छटा मन के आसमान में धूम मचाने

दर्द के मुस्तैद आलम में उम्मीदों का बीज बोने

दूर उस क्षितिज पर रचे -बसे

इंद्रधनुष के रंगों से सजे मेरे दिल को ,

 दिन को मेरे कभी तो ले आऊंगा मैं,

अपनी किस्मत से भिड़कर अपने हिस्से की खुशियां कभी तो पा जाऊंगा मैं  



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