Abhilasha Chauhan
Inspirational
उपवन जैसा सोहता, मेरा भारत देश
सुंदर सुमनों से सजा, बहुरंगी परिवेश।
बहुरंगी परिवेश, दिखे जन-जन में समता
सत्य शांति संदेश, बसे मन करुणा-ममता।
रहे एकता मूल, प्रेम से पूरित जन-मन
प्रकृति करे श्रृंगार, सजा ये सुंदर उपवन।
भ्रम
आ रहा मधुमास ...
चाय के बिन कह...
वो कली मासूम ...
दिल तो बच्चा ...
कुंडलियां छंद...
भोर उजली स्वर...
कुंडलिया छंद(...
प्रकृति के रं...
कृष्ण लीला (स...
क्योंकि हमें तो यहां आना ही था यही सोचकर इस मन को कई बार बहलाया है। क्योंकि हमें तो यहां आना ही था यही सोचकर इस मन को कई बार बहलाया है।
आज उसी का परिणाम तू। भुगत रहा। आज उसी का परिणाम तू। भुगत रहा।
सारा मंजर झूम उठा उठा शब्दो का दूलारा मां भीमाई ने लिख दिया संंविधान हमारा ! सारा मंजर झूम उठा उठा शब्दो का दूलारा मां भीमाई ने लिख दिया संंविधान हमारा !
असंभव बस किंचित सी भर लेना अपने भीतर मानवता ! असंभव बस किंचित सी भर लेना अपने भीतर मानवता !
लाख लोग मुझे रोके, एक दिन अपने आसमाँ तक पहुँच जाऊंगी। लाख लोग मुझे रोके, एक दिन अपने आसमाँ तक पहुँच जाऊंगी।
जिसके कहने भर से हर बात सच हो जाती है, जिसके सर पर हाथ फेरने से हिम्मत जिसके कहने भर से हर बात सच हो जाती है, जिसके सर पर हाथ फेरने से...
ओ वीर मुसाफिर उठ जाग आज ! इस देश के खातिर मर जाना। ओ वीर मुसाफिर उठ जाग आज ! इस देश के खातिर मर जाना।
उसे औरों पर लुटाने की कोशिश नहीं करते। उसे औरों पर लुटाने की कोशिश नहीं करते।
अकेलेपन से सोचता हूं तेरे बारे में तुम्ही हो साथी मेरे जीवन के ! अकेलेपन से सोचता हूं तेरे बारे में तुम्ही हो साथी मेरे जीवन के !
हमारा परिवार हमारा ग़ौरव, हमारा परिवार सबसे प्यारा परिवार। हमारा परिवार हमारा ग़ौरव, हमारा परिवार सबसे प्यारा परिवार।
कि है मारे सब यहाँ अपनी-अपनी सोच के। कि है मारे सब यहाँ अपनी-अपनी सोच के।
थी चाह गर्दिश-ए- किस्मत में एक जुगनू देखूँ... जुल्मत-ए-शब में एक उभरता नजारा देखूँ। थी चाह गर्दिश-ए- किस्मत में एक जुगनू देखूँ... जुल्मत-ए-शब में एक उभरता नजारा...
आए दिन दीदार के तेरे मेरेे इख्तयार के आए दिन बहार के मोहब्बत इंतजार के ! आए दिन दीदार के तेरे मेरेे इख्तयार के आए दिन बहार के मोहब्बत इंतजार के !
ए बापू तुम आ जाओ हम सब का कल्याण करो इतनी सी है दिल की आरजू। ए बापू तुम आ जाओ हम सब का कल्याण करो इतनी सी है दिल की आरजू।
पर जीने के लिए कुछ और भी चाहिए वो भी तुमने ही बताया न। पर जीने के लिए कुछ और भी चाहिए वो भी तुमने ही बताया न।
कैसे बंट सकता है फिर मेरा भारत छोटे छोटे संकीर्ण परिवेश में। कैसे बंट सकता है फिर मेरा भारत छोटे छोटे संकीर्ण परिवेश में।
खुद के सपनों को जिसने है मारा अपने बच्चों का भविष्य है उसने संवारा खुद के सपनों को जिसने है मारा अपने बच्चों का भविष्य है उसने संवारा
उन फब्तियों का शिकार हो जाती कभी-कभी सोचती....... उन फब्तियों का शिकार हो जाती कभी-कभी सोचती.......
काँटों के बीच पला मैं, काँटों के बीच खिला मैं। काँटों के बीच पला मैं, काँटों के बीच खिला मैं।
मंदिरों के पवित्र द्वार खुले फिर से अलौकिक वरदान आज हमें दो। मंदिरों के पवित्र द्वार खुले फिर से अलौकिक वरदान आज हमें दो।