मेलजोल और सहयोग
मेलजोल और सहयोग
मिल-जुलकर हल करें हम, सारी समस्याएं,
आपसी मेलजोल और, सहयोग हम बढ़ाएं।
आए सब अकेले जग में, अकेले ही जाएंगे,
लेकिन अकेले जग में हम, रह ही न पाएंगे।
अकेलापन समस्या जग में, बड़े दुःख पाएंगे,
मिलकर हंसेंगे सब के संग, और मुस्कुराएंगे।
हो कोई भी दुखी न जग में, सब ही मुस्कुराएं,
आपसी मेलजोल और ,सहयोग हम बढ़ाएं।
व्याधि हो कोई तन की ,होवे मन का कोई रोग,
कोई भी न टिकने पाए, जो है आपसी सहयोग।
परिजन सा प्यार पाएं ,सभी जगह सभी लोग,
विनम्रता से स्नेह मिलेगा ,ऐसा ही बनेगा संयोग।
हेतु रहित हम देवें प्यार, हेतु रहित ही हम पाए,
आपसी मेलजोल और ,सहयोग हम बढ़ाएं।
सहयोग से हल होंगी समस्याएं, न करें कोई शंका,
कपि सहयोग से हराया रावण, जीती सोने की लंका।
कुछ गिनती के तत्त्व मिलकर, सब ही जग बनाते हैं,
सात स्वर संगीत के मिल तो ,मधुर तान बन जाते हैं।
सात रंग प्रकाश किरण मिल ,सुंदर जगत यह बनाएं,
आपसी मेलजोल और, सहयोग हम बढ़ाएं।
