मेहनत रंग लाएगी...!!!
मेहनत रंग लाएगी...!!!
किसी इंसान की सरलता को
उसकी 'बेवकूफी' न समझें,
क्योंकि वो भी इस 'दुनियादारी' की
थोड़ी-बहुत समझ रखता है...!
उसे भी ये मालूम है
कि इस 'कलियुग' में
जिनकी जेबें 'नोटों से भरी' होतीं हैं,
वहीं असली 'खिलाड़ी' बन सकते हैं!
और बाकी सब कमजोर-लाचार 'प्यादे'...
सुनने में 'कटु' है, मगर
ये सौ प्रतिशत 'सत्य' है
कि अगर एक 'ईमानदार' इंसान
अपने हक़ के लिए
'आवाज़' बुलंद नहीं कर पाएगा,
तो उसकी आवाज़ उन गुमनाम
'अंधी' गलियों में दबी-की-दबी रह जाएगी...
जहाँ से निकलने का
कोई रास्ता ही नहीं!
ऐसी दास्ताँ भी हैं हर 'ईमान के पक्के'
सहज-सरल इंसान की,
जिसे 'कलियुग की काली छाया'
छू भी नहीं पायी,
मगर बदनसीबी ये है कि
दूसरों की भलाई के बारे में
दिन-रात सोचते-सोचते बेशक़ उसने
अपने सपनों की 'कुटिया' ही जला डाली!!
और आज जब पीछे मुड़कर
देखता है वो,
तो बस खामोशी में
'मुफलिसी की खंडहरनुमा' बरबादी की सिसकियाँ ही सुनाई पड़ती हैं...!!!
उसकी बरबादी से 'रईसों' का
क्या जाता है...!
उन्हें तो अपनी
खुशहाल 'कामयाब' ज़िन्दगी की
फिक्र है,
कोई 'मेहनतकश' इंसान
मुफलिसी में दिन-रात
जद्दोजहद करते-करते
जीये-मरे, तो उन्हें
क्या 'फर्क' पड़नेवाला है...!!!
वो तो अपनी आँखों में
रईसी का 'रंगीन' चश्मा पहने हुए
अपनी शक्ति-प्रदर्शन में लगे हुए हैं...।
इस सच्चाई से हर 'मेहनतकश' इंसान
पूरी तरह वाकिफ है,
मगर वो चूप है...।
इसका मतलब ये नहीं कि वो 'कायर" है!
ऊपरवाला जानता है कि यहीं से
आनेवाली आंधी और तूफान और
अंधाधुंध हलचल की शुरूआत होगी,
जो कि 'फैसले की घड़ी' होगी...
समय का समय समय ही खेलेगा...
वक्त बदलेगा हर एक 'मेहनतकश' इंसान की...
महज़ 'कागज़ी' प्रमाणपत्रों की नहीं,
(आनेवाला 'कल' ही देखेगा...)
हरेक कर्मोत्साहित 'खुद्दार' इंसान की
'कर्मयोग की जीत' होगी...
उसके 'वास्तविक' ज्ञान की 'ज्योति' प्रज्वलित होगी...!!!
