मौत तुम एक कविता हो,,
मौत तुम एक कविता हो,,
मौत तुम एक कविता हों
रंजिश ए नफसी हो,
जर्द ए हंसी हों,
सर्द रात सी कामिल हों,
हर स्थिति में शामिल हों,
अश्क ए आंखो से उभरती हों,
मस्तिक से रूह में उतरती हों,
मनोदशा से तुम द्रोप्ति,
कलयुग की सीता हो,
कुरान में भी हैं वर्णन तेरा,
सभी को मिले वो गीता हों,
मौत तुम एक कविता हों,,।
