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Shami Ahamad

Others

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Shami Ahamad

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ह्रदय रोता है,,

ह्रदय रोता है,,

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दुख्म विचार जब मन में होता हैं,
तब ह्रदय रोता है,

पुरुष तो एक पारिवारिक पेड़ होता हैं 
जब उसका बीज खोता है,
तब ह्रदय रोता है,
 
सारा जीवन अंधेरों में गुजर जाता हैं,
वक्त उसका एक चिंगारी से रोशन होता हैं,
आदमी की आखें तो हस्ती है ,
मगर उसका ह्रदय रोता है,

आदमी से ही तो सबका मुस्कुराया चहरा होता हैं,
मुश्किलों में भी परिवार आराम से सोता है,
आदमी नहीं,
              उसका हृदय रोता है,।।

दूसरो के लिऐ वो अपने सारे सपने खोते हैं,
अपनी उम्मीदों पर वो उनके सपनों के खेत जोतते है,
आदमी नहीं,
               आदमियों के हृदय रोते है,




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