STORYMIRROR

Vikas Rohilla

Abstract

3  

Vikas Rohilla

Abstract

मौन हूँ अनभिज्ञ नहीं

मौन हूँ अनभिज्ञ नहीं

1 min
12K

जानता हूँ इस जगत में फूल की उम्र कितनी है, 

और तुम्हारे दिल में मेरे लिये फ़िक्र कितनी है, 

इसलिये हवन कुंड की ज्वाला का यज्ञ नही हूँ मैं, 

तेरे लिये मौन हूँ लेकिन अनभिज्ञ नहीं हूँ मैं।।


मौन ही हैं मेरा साक्षी उस प्रत्येक क्षण का, 

वातावरण के आवरण में प्रत्येक कण का, 

तेरा मेरा साथ कब तक कोई भाग्य नहीं हूँ मैं, 

तेरे लिये मौन हूँ लेकिन अनभिज्ञ नहीं हूँ मैं।।


मौन अदम्य शक्ति है मौन हैं आगाज़ भी, 

मौन अनन्य भक्ति है मौन हैं आवाज़ भी,

मौन है अंतिम सारथी फिर भी सर्वज्ञ नहीं हूँ मैं, 

तेरे लिये मौन हूँ लेकिन अनभिज्ञ नहीं हूँ मैं।।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract