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Deepika Raj Solanki

Tragedy

4  

Deepika Raj Solanki

Tragedy

मैंने प्यार क्यों किया?

मैंने प्यार क्यों किया?

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मैंने प्यार क्यों किया?

कांटों का ताज सर पर क्यों लिया?

रुसवाई जहां की ले ली,

बातों में तेरी यू उलझे,

कि समझ ना बात किसी की आई,

प्यार में तेरे आंख बंद कर इश्क के समंदर में डुबकी लगाई,

पर साहिल तक हमारे प्यार की कश्ती ना आ पाई।


साथ तेरे चलने को, अपनों को पीछे छोड़,

ताउम्र तेरे लिए गवाई,

  

रात को दिन, दिन को रात किया,

तेरे प्यार में यूं घूल गए,

प्यार को इबादत समझ खुदा को भूल गए,

पर...... तूने ऐसा काम किया,

बेवफाई में दर्ज अपना नाम किया,

  

मैंने प्यार क्यों किया?

मीलों की जो दूरी थी,

माना तेरी मजबूरी थी,

हम समझते थे दिलों में तो प्यार है,

धड़कन में तेरी हमारा ही अधिकार है

दूरियों की फिर क्या बात है,

हम दो जिस्म एक जान हैं,

पर... तुमने रची कोई दूसरी कहानी थी,

इश्क की दूसरी बस्ती तुमने बसानी थी,

अब याद तुम्हें हमारी कहां आनी थी?

बेवफाई की तस्वीर तुम्हारी सामने आनी थी,

खुदा ने इश्क पर कहर बरसाया,

तेरा बेवफाई का चेहरा दिखाया,

गए थे जिस की इबादत भूल,

उसी ने खारे इश्क के समंदर में डूबने से बचाया,

मैंने प्यार क्यों किया?

इस बात पर खूब रोना आया।

   

   

  जो तन्हाई कभी लगती थी अपनी,

  लबों पर हंसी जड़ती थी अभी,

  वही तन्हाई आज डशती हैं

  तेरी बेवफाई पर हंसती है,

  तूने विश्वास का मेरे घात किया,

  मेरी वफा को बदनाम किया,

  मैंने प्यार क्यों किया?

  आज महफिलों मे नाकाम इश्क की दास्ता गूंजती है,

  निगाहें लोगों की चुभती है,

  इश्क में हम तो बदनाम हुए,

  चर्चे हमारे खास हुए,

  तेरी बेवफाई के हम तो शिकार हुए,

  नादान थे हम इश्क में बेकार हुए,

  आज हम प्यार में हारे हुए सिपाही हुए,

  हार कर दिल यही गाता है,

  मैंने प्यार क्यों किया बस यही दोहराता है।

 


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