D.N. Jha
Comedy
मैं कोई कवि नहीं हूॅं,बस दिल के भाव लिखता हूॅं।
चुनिंदा वर्णों को सजा कर,मैं शब्दों को पिरोता हूॅं।
मेरे छंदों में रसों का हो, आभाव,मुझे माफ़ करना।
मुझे मालूम नहीं 'दीपक', किस भाव को संजोता हूॅं।
चंद्रयान
चारधाम (कुंडल...
महॅंगाई
मालिक
विश्राम को हर...
योग
आएगा तूफान
बिखर रहे परिव...
आओ सीखें कुछ ...
किसान
यमलोक की गद्दी पर, चित्रगुप्त बैठे थे परेशान। यमलोक की गद्दी पर, चित्रगुप्त बैठे थे परेशान।
काश! पुरुषों का भी श्रृंगार बाॅक्स होता काजल लिपिस्टिक उसमें कतई न होता। काश! पुरुषों का भी श्रृंगार बाॅक्स होता काजल लिपिस्टिक उसमें कतई न होता।
आज सुबह सुबह श्रीमती जी ने जैसे ही मुझे जगाया। आज सुबह सुबह श्रीमती जी ने जैसे ही मुझे जगाया।
पीपल भी सूना पड़ा है झूले भी ढीले हो गए पीपल भी सूना पड़ा है झूले भी ढीले हो गए
कौन है अच्छा, कौन बुरा है, दोनों की अपनी खूबी। कौन है अच्छा, कौन बुरा है, दोनों की अपनी खूबी।
तुम ही मेरी सुबह की चाय तुम्ही मेरा कलेवा हो। तुम ही मेरी सुबह की चाय तुम्ही मेरा कलेवा हो।
मैंने कहा, एक चिराग मिला था मुझे कविता लिखने वाला उसमें निकला जिन। मैंने कहा, एक चिराग मिला था मुझे कविता लिखने वाला उसमें निकला जिन।
धीरे धीरे नशा बढ़ रहा है देखें कौन कौन नए राज़ खोलता। धीरे धीरे नशा बढ़ रहा है देखें कौन कौन नए राज़ खोलता।
सुनो प्रिये तुम्हारी उन आंखों से डर लगता है। सुनो प्रिये तुम्हारी उन आंखों से डर लगता है।
इससे ज्यादा मुहब्बत भी ठीक नहीं है यारों जोश में ये एसिडिटी के दलदल में धंसा जाती है इससे ज्यादा मुहब्बत भी ठीक नहीं है यारों जोश में ये एसिडिटी के दलदल में धंसा...
कार्यालय में दिखने वाले, ये प्राणी बॉस कहलाते। कार्यालय में दिखने वाले, ये प्राणी बॉस कहलाते।
अम्मा अब्बा का करो या ना करो तुम कदर, पेरेंट्स के वीडियो पर दुख जताते सही। अम्मा अब्बा का करो या ना करो तुम कदर, पेरेंट्स के वीडियो पर दुख जताते सही।
चाहे हम देश के प्रति अपनी बलि भी दे दें, तो लोग यही कहेंगे दिखाने के लिए है। चाहे हम देश के प्रति अपनी बलि भी दे दें, तो लोग यही कहेंगे दिखाने के लिए है।
शर्मिंदा हो रहे हो मेरे कुछ ही लफ्जों से अब छोड़ो पूरा मसला मैं मान तो गया। शर्मिंदा हो रहे हो मेरे कुछ ही लफ्जों से अब छोड़ो पूरा मसला मैं मान तो गया।
थानेदार अब असमंजस में था बिना बात के कशमकश में था थानेदार अब असमंजस में था बिना बात के कशमकश में था
लड़कियों ने आंखें बड़ी की, आंखें तरेरी , हाथ नचाते हुए बोली समय नहीं है। लड़कियों ने आंखें बड़ी की, आंखें तरेरी , हाथ नचाते हुए बोली समय नहीं है।
आजकल डर का माहौल कुछ ज्यादा है आजकल डर का माहौल कुछ ज्यादा है। आजकल डर का माहौल कुछ ज्यादा है आजकल डर का माहौल कुछ ज्यादा है।
मेरे प्रभु! आफर सोलह आने है सही, अवसर का लाभ उठाइए अपने इष्ट मित्रों को भी बताइए, मेरे प्रभु! आफर सोलह आने है सही, अवसर का लाभ उठाइए अपने इष्ट मित्रों को भी...
अमेज़न, मीशो आजकल नई आ गयी है मजबूरी सेल के दिनों में तो काफी सम्हल कर रहना जरूरी अमेज़न, मीशो आजकल नई आ गयी है मजबूरी सेल के दिनों में तो काफी सम्हल कर र...
नेता जी से कुछ परिचय हुआ उन्हें मेरा कहना भी भाया नेता जी से कुछ परिचय हुआ उन्हें मेरा कहना भी भाया