STORYMIRROR

D.N. Jha

Comedy

3  

D.N. Jha

Comedy

मैं कोई कवि नहीं हूॅं

मैं कोई कवि नहीं हूॅं

1 min
149

मैं कोई कवि नहीं हूॅं,बस दिल के भाव लिखता हूॅं।

चुनिंदा वर्णों को सजा कर,मैं शब्दों को पिरोता हूॅं।


मेरे छंदों में रसों का हो, आभाव,मुझे माफ़ करना।

मुझे मालूम नहीं 'दीपक', किस भाव को संजोता हूॅं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Comedy