STORYMIRROR

D.N. Jha

Comedy

3  

D.N. Jha

Comedy

मैं कोई कवि नहीं हूॅं

मैं कोई कवि नहीं हूॅं

1 min
145

मैं कोई कवि नहीं हूॅं,बस दिल के भाव लिखता हूॅं।

चुनिंदा वर्णों को सजा कर,मैं शब्दों को पिरोता हूॅं।


मेरे छंदों में रसों का हो, आभाव,मुझे माफ़ करना।

मुझे मालूम नहीं 'दीपक', किस भाव को संजोता हूॅं।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Comedy