D.N. Jha
Comedy
मैं कोई कवि नहीं हूॅं,बस दिल के भाव लिखता हूॅं।
चुनिंदा वर्णों को सजा कर,मैं शब्दों को पिरोता हूॅं।
मेरे छंदों में रसों का हो, आभाव,मुझे माफ़ करना।
मुझे मालूम नहीं 'दीपक', किस भाव को संजोता हूॅं।
चंद्रयान
चारधाम (कुंडल...
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किसान
फूलों के जहाँपनाह अब कलियाँ भौरों का इंतज़ार नहीं करतीं भौंरों के पीछे दौड़ जाती हैं फूलों के जहाँपनाह अब कलियाँ भौरों का इंतज़ार नहीं करतीं भौंरों के पी...
वो अचरज मे पड़ जाते हैं शहरों की सड़कों पर...। वो अचरज मे पड़ जाते हैं शहरों की सड़कों पर...।
अपने दिए हुए अल्फाज़ अलग है कुछ तो गड़बड़ है। अपने दिए हुए अल्फाज़ अलग है कुछ तो गड़बड़ है।
अजीब लोग थे वहाँ के, जैसे हों आदिमानव... अजीब लोग थे वहाँ के, जैसे हों आदिमानव...
मुन्ने को छोड़ चल कुछ अच्छा चूस के आते हैं चल कुछ अच्छा चूस के आते हैं। मुन्ने को छोड़ चल कुछ अच्छा चूस के आते हैं चल कुछ अच्छा चूस के आते हैं।
इस भरी जवानी में ही, मुझे ओल्ड कर दिया। इस भरी जवानी में ही, मुझे ओल्ड कर दिया।
स्वाद ले लेके आइसक्रीम खाई पर जनाब चाय न पिलाई। स्वाद ले लेके आइसक्रीम खाई पर जनाब चाय न पिलाई।
शर्मा जी ने सबक ये सीखा, करो समझ बूझ कर भला किसी का। शर्मा जी ने सबक ये सीखा, करो समझ बूझ कर भला किसी का।
अपनी आँखें मलते-मलते मेंढक बोला यूँ मचल के... अपनी आँखें मलते-मलते मेंढक बोला यूँ मचल के...
हल्के में मत लेना इन शर्मा जी, वर्मा जी, मिश्रा जी को यही हमारे असली करता धरता है। हल्के में मत लेना इन शर्मा जी, वर्मा जी, मिश्रा जी को यही हमारे असली करत...
खुदा कोई ऐसा इंसान तो बना जिसकी यादें हमें भी सताए। खुदा कोई ऐसा इंसान तो बना जिसकी यादें हमें भी सताए।
फिर एक अधिकारी नाम ने कैसे कर दिखाया। फिर एक अधिकारी नाम ने कैसे कर दिखाया।
आश्वासन से सबका पेट भरते बडे-बडे जनता से वादे करते, आश्वासन से सबका पेट भरते बडे-बडे जनता से वादे करते,
क्योंकि आज रेडियो टीवी, कंप्यूटर सभी एक स्मार्ट फ़ोन में पल रहा। क्योंकि आज रेडियो टीवी, कंप्यूटर सभी एक स्मार्ट फ़ोन में पल रहा।
बोलो तो फिर ? चलें चाँद पे ? खासी मस्ती मारेंगे जिंदा ज़न्नत पा लेंगे। बोलो तो फिर ? चलें चाँद पे ? खासी मस्ती मारेंगे जिंदा ज़न्नत पा लेंगे...
वैसे यहाँ का सब समाचार नीक है, विशेष क्या लिखें बाकी सब ठीक है ! वैसे यहाँ का सब समाचार नीक है, विशेष क्या लिखें बाकी सब ठीक है !
बिना बुलाये आ जाती है अपने पर शामत। बिना बुलाये आ जाती है अपने पर शामत।
उसने हमसे पूछ लिया, दूसरी कविता फिर कब सुनायेंगे ? उसने हमसे पूछ लिया, दूसरी कविता फिर कब सुनायेंगे ?
सर पिटता हुआ पति बोला, धन्य हो तुम मेरी रासलीला। सर पिटता हुआ पति बोला, धन्य हो तुम मेरी रासलीला।
पर उन्हें कौन बताए कि हम घुम्मकड़ नहीं बल्कि भुलक्कड़ है। पर उन्हें कौन बताए कि हम घुम्मकड़ नहीं बल्कि भुलक्कड़ है।