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Sugan Godha

Abstract


5.0  

Sugan Godha

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" मैं हिन्दी भाषा हूँ "

" मैं हिन्दी भाषा हूँ "

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श्रींगार अलंकारों से कर, स्वाद रसों से पाकर !

लय को बाँध छान्दो से, यति - गति से आयी हूँ।


मत बाँध मुझे शब्दों में, न किताबों में कैद कर !

वाचन में भावों से लिपटी,वो मिठास मैं लायी हूँ।


मत भूलो मुझे तुम, समझकर अनजानी भाषा !

प्राचीन संस्कृति से संस्कार मैं ही तो लायी हूँ।


भाषा ही नहीं शान हूँ, मैं ही तो पहचान हूँ !

मान ही नही अभिमान हूँ, तेरा मैं सम्मान हूँ।


ना करो अपमानित, वेदों के ज्ञान से उपजी हूँ !

हिंद के गौरव का, गुणगान बन आयी हूँ।


ऊंचे हिमालय की, मैं ही तो परिभाषा हूँ !

कल-कल बहती, गंगा की धारा हूँ।


मात्र भूमि की बिंदी, हिंद की मै हिन्दी हूँ !

हाँ राष्ट्र की आशा हूँ, मैं हिन्दी भाषा हूँ।


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