STORYMIRROR

Supriya Devkar

Inspirational

4  

Supriya Devkar

Inspirational

मैं एक नारी हूँ

मैं एक नारी हूँ

1 min
365

बचपन से माँ ने छुपाया 

अपने पल्लू के पीछे 

बाबा ने सिखाया जीना 

सर झुका के नीचे 


भाई करता था हरदम

रखवाली नजरों के पीछे से

बहना सिखाती रही 

जीने के ढंग अच्छे से


पर क्या बात है मुझ में 

मैं क्यूं नहीं आजाद

इतनी पाबंंदीयो से 

घिरा है मेरा ताज 


क्यूं हमेशा मुझको 

बनना पड़ता है सीता 

अग्नि-परीक्षा पार करके 

मुझे क्या है मिलता


चरित्र किसका है बेदाग यहाँ 

हमें भी तो बताओ 

हर नजरकैद नारी को 

जरा कैद से हटाओ 


मुझे हक हैं जीने का 

आसमान को छुने का

अपनी ताकद आजमाकर

हर मंजर को पाने का


मैं एक नारी हूँ 

मुझे गर्व है खुद पर

हर कदम रखती हूँ

अपने बलबूते पर।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational