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Kawaljeet GILL

Abstract Classics Inspirational

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Kawaljeet GILL

Abstract Classics Inspirational

मैं और मेरी तन्हाइयाँ

मैं और मेरी तन्हाइयाँ

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मैं और मेरी तनहाइयाँ हर पल रहती संग संग एक दूजे से जुदा नहीं

एक दूजे की हमदर्द हम एक दूजे की सखियाँ मैं और मेरी तनहाइयाँ


हाल एक दूजे का एक दूजे से पूछती हर पल मैं और मेरी तनहाइयाँ

अक्सर हम करती है बाते एक दूजे से मैं और मेरी तनहाइयाँ


मेरे आँसू हर पल मोतियो की तरह संभालती मेरी ये तनहाइयाँ

एक पल भी मुझे उदास ना होने देती ये मेरी तनहाइयाँ


साये की तरह रहती हर पल संग मेरे ये मेरी तनहाइयाँ

सन्नाटे में भी ये मुझे कभी ना डरने देती ये मेरी तनहाइयाँ


खामोशी में भी हर पल आवाज़ लगाती है ये मेरी तनहाइयाँ

दूर एक पल जब भी हो जाऊं मैं तो हिचकियो सी लगती ये तनहाइयाँ


महफ़िलो में भी मुझसे मिलने साथ निभाने आ जाती मेरी तनहाइयाँ

प्यार है इनको मुझसे इतना कि पल भर को भी मुझसे दूर नही रहती ये मेरी तनहाइयाँ


जाने कैसा रिश्ता इनसे मेरा जाने क्यों लगे मुझे बहन सी ये मेरी तनहाइयाँ

कभी कभी तो लगता है ऐसे जैसे इनसे कोई जन्मो पुराना नाता मेरा


कलयुग से नही सतयुग से है साथ मेरा तेरा रिश्ता पुराना ये कहती मेरी तनहाइयाँ

सोच में पड़ जाते हैं अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनकर क्या सत्य कहती मेरी तनहाइयाँ।


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