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Praveen Gola

Abstract

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Praveen Gola

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मानवता और पशुता

मानवता और पशुता

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मन में बसी ख्वाहिशों को सजाने,

कागज पर रंग बिखेरते थे रंगीन ब्रश,

थॉमस डॉटी की कला है कितनी अद्वितीय,

जिसने प्रकृति की छांव को किया अपने वश।

 

चारों ओर बांसुरी की मधुर ध्वनि,

सर्दी की ठंड में भी घुलती गर्माहट,

देखते ही देखते मन खो जाता,

 प्राकृतिक दृश्य को देखने मन जोहता बाट।


लंबी-लंबी सड़कें और ऊँची पहाड़ियाँ,

सुंदरता की गाथा बनी उनकी चित्रकारियाँ,

कुत्ते ने बढ़ाया और प्रकृति का सौंदर्य,

मानवता और पशुता की मैत्री करती आश्चर्य।


आधी नींद में आँखें खुल जाती हैं,

उनके चित्रों की छवि दिल में छप जाती है,

थॉमस डॉटी हमेशा हमारे दिलों में बसते हैं,

 उनकी कला से कितने नये चित्र सजते हैं।।


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