Sumit. Malhotra
Action Inspirational
मत खोना कभी भी अपने आप को,
संभालें रखना हमेशा हौसले अपने।
माना जीवन में कोई उमंग नहीं है,
आपकी कोई कटी पतंग तो नहीं है।
अपनी फितरत को घर में कैद मत करो,
रोशनी हो खिड़कियों के पार जाओ ना।
मोहब्बत का मौ...
प्रकृति के गज...
पानी की प्रत्...
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बेमौसम बरसात
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स्वच्छता से र...
हाँ ! मजदूर हैं हम ।साहब ! दर- दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं हम। हाँ ! मजदूर हैं हम ।साहब ! दर- दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं हम।
अभी-अभी तो ख्वाहिशों ने की थी उड़ान की शुरुआत अभी-अभी तो ख्वाहिशों ने की थी उड़ान की शुरुआत
यह कश्मीर तो ना देंगे हम वह कश्मीर भी ले लेंगे इस धरती मैया की खातिर जान भी अपनी दे दे यह कश्मीर तो ना देंगे हम वह कश्मीर भी ले लेंगे इस धरती मैया की खातिर जान भी अ...
ये एक खूबसूरत दुनिया है, जिसे ईश्वर और खुदा ने मिलकर इंसानों के लिए बनाया है ये एक खूबसूरत दुनिया है, जिसे ईश्वर और खुदा ने मिलकर इंसानों के लिए बनाया है
मर्यादा मर रही प्रतिदिन अत्याचार, अन्याय, भय, भ्रष्टाचार पर्याय युवा बन रहा है मर्यादा मर रही प्रतिदिन अत्याचार, अन्याय, भय, भ्रष्टाचार पर्याय युवा बन रह...
दर्द अगर आते हैं, दर्द के सुर में गाते है, हर काल में यूं तो, निज शान बचाते हैं। दर्द अगर आते हैं, दर्द के सुर में गाते है, हर काल में यूं तो, निज शान बचाते ह...
अब ऑनलाइन भी लड़कियों के लिए नए नियम बना रहे हैं। अब ऑनलाइन भी लड़कियों के लिए नए नियम बना रहे हैं।
सब को आँचल की छाया में बिठाकर, खुद सहती है धूप सब को आँचल की छाया में बिठाकर, खुद सहती है धूप
कुछ नीति नियम के साथ भरपूर मस्ती के साथ। कुछ नीति नियम के साथ भरपूर मस्ती के साथ।
कुछ हक़ तो उसका भी था जिसने हमदम हमसफर बन सात जन्मो के लिए साथ निभाने का वचन दिया, कुछ हक़ तो उसका भी था जिसने हमदम हमसफर बन सात जन्मो के लिए साथ निभाने का वचन दिया...
मजहब से उनका काम नहीं, बस झूठी शान का तर्ज़ है ये मजहब से उनका काम नहीं, बस झूठी शान का तर्ज़ है ये
यह कविता शहीदो को सलामी दे रही है। यह कविता शहीदो को सलामी दे रही है।
छोड़ दे कान्हा बस एक बार कैसे छोड़ दूँ तुझे मैं कंस मामा छोड़ दे कान्हा बस एक बार कैसे छोड़ दूँ तुझे मैं कंस मामा
प्रधान मंत्री जी, स्पष्ट उद्देश्य के साथ, साल दर साल भारत का नेतृत्व कर रहे हैं। प्रधान मंत्री जी, स्पष्ट उद्देश्य के साथ, साल दर साल भारत का नेतृत्व कर रहे ह...
नई ऊर्जा और हिम्मत का संचार कर खुद को खुद के लिए खास बना पाती हूँ मैं।। नई ऊर्जा और हिम्मत का संचार कर खुद को खुद के लिए खास बना पाती हूँ मैं।।
अब कृपा नहीं अधिकार चाहिये, मेरे वजूद पर ना उपकार चाहिये, अब कृपा नहीं अधिकार चाहिये, मेरे वजूद पर ना उपकार चाहिये,
पीपल का हूँ वृक्ष अभागा सूखे नयनन कृश है काया। पीपल का हूँ वृक्ष अभागा सूखे नयनन कृश है काया।
लाखों कोस की जान ले, कवि की है पहचान।। लाखों कोस की जान ले, कवि की है पहचान।।
तीन कपड़ों में तुम्हें ब्याह कर लाए थे अपने होनहार बेटे के लिए तीन कपड़ों में तुम्हें ब्याह कर लाए थे अपने होनहार बेटे के लिए
कष्टों में कभी जन डूबे, आपदा कोई आती है, टूट पड़ेगा जन सैलाब, मदद भी मिल जाती है कष्टों में कभी जन डूबे, आपदा कोई आती है, टूट पड़ेगा जन सैलाब, मदद भी मिल जाती...