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कुमार संदीप

Abstract Others

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कुमार संदीप

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मानो या ना मानो

मानो या ना मानो

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मानो या ना मानो

मृत्यु है एक अटल सत्य

हमें एक दिन इस जग से

दूर बहुत दूर जाना पड़ेगा

हाँ हमें इस जग को छोड़कर जाना पड़ेगा।।


मानो या ना मानो

मृत्यु है एक अकाट्य सत्य

अपनों से दूर बहुत दूर

हमें एक दिन जाना पड़ेगा

हाँ हमें इस दुनिया को छोड़कर जाना पड़ेगा।।


मानो या ना मानो

हम एक दिन गहरी निद्रा में

सो जाएंगे फिर वापस हम

न उठ पाएंगे

हाँ हम इस जग को छोड़कर सर्वदा के लिए चले जाएंगे।।


मानो या ना मानो

एक दिन खटखटाएगी मृत्यु

दरवाजा और हमें उठकर जाना पड़ेगा

छोड़कर अपनों को हमें बहुत दूर जाना पड़ेगा

हाँ हमें इस जग को छोड़कर जाना पड़ेगा।।


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