माँ
माँ
ममता की सागर है मां।
करुणा की गागर है मां।।
दिल की भोली होती मां।
सब पे ममता बरसाती मां।।
भाग्यशाली है वे लोग,
जिनके घर में होती मां।
अपने वो भूखी रखकर,
बच्चों को खिलाती मां।।
कदम-कदम मिलाकर चलती,
सुख-दुख में मुस्कुराती मां।
बच्चों की इच्छा पूरी करती,
कठिन परिश्रम कर जाती मां।।
बच्चे हैं यह क्यों भूल जाते,
थके होने पर खाना बनाती मां।
संघर्ष की व उदाहरण,
मंदिर की है मूरत मां।।
बोलना, चलना, पढ़ना, सिखाती,
जीवन का भेद बताती मां।
तेरा ही तो अंश हूं,
तू ही जीवन दाता मां।।
मां नहीं तो दुनिया नहीं,
सृष्टि का निर्माता मां।
सब लोग यह कहते हैं,
जग की जननी होती मां।।
