मां
मां
ममतामई मां तुझ पर जान न्योछावर है
एक झलक पाने के लिए नयन तरसे हैं।
तू छोड़ कर कहां चली गई मां,
तेरी यादों के सहारे हूं।
सांसें केवल चल रही मां,
शरीर निर्बल लिए बैठा हूं।
मां चीखती चिल्लाती है,
काम कर के बोझ उठाती है।
पेट भरती, पानी पीती,
फुटपाथ में सो जाती है।
बच्चों की जुदाई में,
रो-रो कर बेहाल हो जाती है।
काम में शहर की ओर जाता हूं,
जाकर वहां मां से मिल जाता हूं।
चूमती चाटती मां सीने से लग जाता हूं
सारे टिस बुलाकर खुशी से झूम जाता हूं।
