STORYMIRROR

डिजेन्द्र कुर्रे कोहिनूर

Abstract

3  

डिजेन्द्र कुर्रे कोहिनूर

Abstract

मां

मां

1 min
286

ममतामई मां तुझ पर जान न्योछावर है

एक झलक पाने के लिए नयन तरसे हैं।

तू छोड़ कर कहां चली गई मां,

                        तेरी यादों के सहारे हूं।


सांसें केवल चल रही मां,

                    शरीर निर्बल लिए बैठा हूं।

मां चीखती चिल्लाती है,

                    काम कर के बोझ उठाती है।


पेट भरती, पानी पीती,

                  फुटपाथ में सो जाती है।

बच्चों की जुदाई में,

          रो-रो कर बेहाल हो जाती है।


काम में शहर की ओर जाता हूं,

            जाकर वहां मां से मिल जाता हूं।

चूमती चाटती मां सीने से लग जाता हूं

    सारे टिस बुलाकर खुशी से झूम जाता हूं।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract