माँ
माँ
माँ पीपल की ठंडी छाया
जिसके तले सुकून ही पाया ।।
माँ गन्ने की मीठी पोरी
दिल सागर, सूरत है भोरी ।।
माँ चटपटी चाट का मनचाहा ठेेला
माँ से रौशन है हर एक मेला ।।
माँ रातों की मीठी लोरी
दिन में धूूूनी से उठती लौ री ।।
माँ जीवन का रंगीन त्यौहार
माँ से है सबकी मनुुहार ।।
माँ से चूल्हा, माँँ से रोटी
पापा तक पैैैठ की अचूूूक ये गोटी ।।
जैसे अनमोल सा कोई गहना
माँ जीवन का ऐसा सपना ।।
माँ अधरों की मीठी मुस्कान
माँ के चरणों मेें दोनोंं जहान ।।
माँ का हाथ कभी ना छूूटे
माँ अपनों से कभी ना रूठे ।।
