माँ की डायरी
माँ की डायरी
माँ की एक डायरी, जिसमें वो समेटती है
बेटे के प्रति प्यार , पति के प्रति दायित्व
बेटी के कर्तव्य और बहन के प्रति औचित्य
अच्छी कहलाने के लिए वो अक्सर टूटती है
क्या इतना आसान है, एक माँ कहलाना
पड़ता है रोज बेटे और बेटी को बहलाना
कोई कमी ना रह जाये, इनके संस्कारो में
रोज पड़ता है उठते ही दोनों को समझाना
धीरे धीरे जवां होने को चले है, बेटी - बेटा
माँ का दिल कमजोर होने लगा है, अब जो
समाज ना कह दे कि उसकी संतान बुरी है
संतान की खातिर,दिल कमजोरी को समेटा
भले ही तुम आसमां छू लो, कामयाबी छूने को
भले ही तुम्हारा सफर, मंगलमय हो हर रोज
माँ की डायरी के एक पन्ने का हिसाब भी नहीं
दे सकते तुम, कलम मना कर देगी माँ लिखने को
तुम उनका कोई भी कर्ज चुका नहीं पाओगे
जब तक हाथ है, सिर पर माँ का तुम्हारे
तुम खुद को जग में हारा हुआ नहीं पाओगे
एक आँसू ना गिरने देना, समीर बह जाए तुम्हारे
माँ - आपकी डायरी का हर एक पन्ना पूजनीय है
कलम और कागज भी, आज महान हो गयी है
जिस दिन बनी थी आप माँ, मेरे साथ मेरी जिंदगी
और आपकी खुशियों की, कीमत महान हो गयी है।
