STORYMIRROR

Shayra dr. Zeenat ahsaan

Inspirational

4  

Shayra dr. Zeenat ahsaan

Inspirational

मां खुदा को माना लेती है

मां खुदा को माना लेती है

1 min
171

मौत के पंजों से बच्चों को छुड़ा लेती हैं

मां दुआ करके खुदा को भी मना लेती हैं


मुफलिसी, ग़ुरबतों,इफ्लास के फांके सहकर

पेट की आग को पानी से बुझा लेती है


अपने मां बाप की खिदमत से बुजुर्गों की दुआ

हर कदम पर मुझे आफ़त से बचा लेती हैं


जब भी चलती हैं हवा तेज मुझे लगता है 

मां मुझे अब भी कलेजे से लगा लेती हैं


क़ौम वो राहे हिदायत से भटकती ही नहीं

जो भी किरदार को आइना बना लेती हैं


टिक ही पता नहीं मैदान में दुश्मन ज़ीनत

जब भी औरत कोई तलवार उठा लेती हैं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational