STORYMIRROR

Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

4  

Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

"मां का कर्ज"

"मां का कर्ज"

2 mins
401

मां तेरा मुझ पर कर्ज इतना है

दरिया में पानी नही जितना है

तेरी ममता का मरहम इतना है

शूल भी लगता फूल महकता है


भाग्य लिखने का हक तुझे होता

मेरे नसीब में कोई गम नही होता

मां के आँचल में जीना- मरना है

बस यही मेरी आखरी तमन्ना है


मां तूने फरिश्तों को भी जना है

मां धरा का जिंदा खुदा अपना है

जिसने भी मां का दिल दुखाया है

उसको खुदा ने बहुत तड़पाया है


मां बिन जीवन पत्थर का पुतला है

जो सुंदर है,पर बेजान बुत कला है

मां ही इस सृष्टि की जननी ब्रह्मा है

जो करे मां सेवा वो मनुष्य भला है


यह पूरी जिंदगी भी मां पर वार दूं

तो भी यह एक छोटा सा लम्हा है

मां तेरी सेवा करना मेरा सपना है

तेरा कर्ज और कद नभ से ऊंचा है।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational