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Shailaja Bhattad

Inspirational

5.0  

Shailaja Bhattad

Inspirational

माँ का गर्व

माँ का गर्व

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प्रेम में लीन, शब्द विहीन

किया आलिंगन कसकर

मानो कह रही हो ,

अब जाने नहीं दूंगी तुझे सरहद परI

शब्दों ने मन की आशंका को पोंछ दिया 

 आलिंगन छूटते ही कह दिया ।

मुझे गर्व है ऐसा पुत्र पाने पर ।

होती गर एक पुत्री भी ,

हो जाती पूरी मेरी तपस्या भी।

फक्र है मुझे, इसे देश का लाल बनाने पर।

इस मिट्टी का कर्ज चुकाने पर।।



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