STORYMIRROR

Mukesh Bissa

Inspirational

3  

Mukesh Bissa

Inspirational

मां बस नाम ही काफी हैं

मां बस नाम ही काफी हैं

1 min
599

यहीं कहीं रहो तुम

करीब मेरे

जब अतीत का सहारा चाहते हैं 

आंखे भीगी सी तुम्हारी


तुम तब भी मेरे साथ होती हो मेरी मां

जैसे मैं तुम्हें छू पाता हूँ

अहसास पा सकता हूँ तुम्हारा

कर सकता हूँ महसूस

ध्वनि पदचाप की तुम्हारी


जब ये अधर कुछ

फ़रियाद करते हैं

तो जैसे

तुम सुनती हो मेरी ध्वनि

बिन कहे मान लेती हो

मेरी हर बात 


और मैं खुश हो जाता हूँ

किसी चंचल बच्चे क़ि तरह

तुम सामने नहीं आती माँ

मैं छूना चाहता हूँ 


तुम्हारा आँचल

देखना चाहता हूँ 

वो ममता भरी आँखें

समेटना चाहता हूँ 

तुम्हारी मुस्कान


सुनो माँ

कहीं जाना नहीं छोड़कर

बस यूँ ही रहो मेरे आसपास

अहसास बनकर


मेरा साथ और विश्वास बनकर

तुम रहो करीब मेरे।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational