Rahulkumar Chaudhary
Comedy Drama Horror
लफ्ज़ों के दाँत नहीं होते,
फिर भी ये काट लेते हैं
दीवारें खड़ी किये बगैर भी,
हमको बाँट देते हैं !
बेवजह दीवार पर
इल्जाम है बंटवारे का
तमाम लोग एक कमरे
में भी जुदा जुदा रहते हैं।
खुशी ज़िंदगी ...
Untitled
दिल की बात
गतिशील रहिए
इंसान की पहचा...
उड़ान बाकी है...
तेरी ख्वाहिश
लफ्जों का प्य...
एतराज
प्यार की कयाम...
अभिमान कीजिए का अभियान चला कर उसके स्वयंभू ब्रांड अम्बेसडर भी बन जाइए। अभिमान कीजिए का अभियान चला कर उसके स्वयंभू ब्रांड अम्बेसडर भी बन जाइए।
वरना मुझे भी कहेगा देवलोक ... बुलडोजर भिजवाऊंगा। वरना मुझे भी कहेगा देवलोक ... बुलडोजर भिजवाऊंगा।
पत्नी घुड़की दे रही थी लेकर बेलन हाथ। काहे किया था वादा फिर सदा निभाओगे साथ। पत्नी घुड़की दे रही थी लेकर बेलन हाथ। काहे किया था वादा फिर सदा निभाओगे साथ।
हमें प्यारी हमारी क्लास ये ग्रुप का झंझट हमसे ना हो पायेगा। हमें प्यारी हमारी क्लास ये ग्रुप का झंझट हमसे ना हो पायेगा।
उमड़ा दिल में प्यार,बता तो दे। छोड़ दिया घर द्वार,बता तो दे।।1 उमड़ा दिल में प्यार,बता तो दे। छोड़ दिया घर द्वार,बता तो दे।।1
हरीश गयन सकुचाय ! सोच विचार के फिर से बोलेन, दूलहिन ! का कुछ मीठा बाय ? हरीश गयन सकुचाय ! सोच विचार के फिर से बोलेन, दूलहिन ! का कुछ मीठा बाय ?
काम ना आती अपनी बुद्धि , कैसे जुगत भिड़ाए। काम ना आती अपनी बुद्धि , कैसे जुगत भिड़ाए।
मनीष को देख कैसा है नेक चुपचाप जेल में बैठा मनीष को देख कैसा है नेक चुपचाप जेल में बैठा
41 बचे_ ये भी चमत्कार हुआ.. लीडरशिप का॥ 41 बचे_ ये भी चमत्कार हुआ.. लीडरशिप का॥
अपनों के चक्कर में पड़े रहिए और कोल्हू के बैल की तरह खटते रहिए। अपनों के चक्कर में पड़े रहिए और कोल्हू के बैल की तरह खटते रहिए।
लड़की बनकर अनेक लड़के बैठे हैं यहां पर। लड़की बनकर अनेक लड़के बैठे हैं यहां पर।
एक दिन मेरी पत्नी मुझसे बोली... डॉक्टर साहब ..... तुम मुझे भूलते जा रहे हो। एक दिन मेरी पत्नी मुझसे बोली... डॉक्टर साहब ..... तुम मुझे भूलते जा रहे ...
सब चेहरों पर हो उल्लास नव वर्ष हो सबके लिए खास। सब चेहरों पर हो उल्लास नव वर्ष हो सबके लिए खास।
इस प्रदर्शनी की शोभा बढ़ायें साथ ही अच्छे किस्म का माल इस प्रदर्शनी की शोभा बढ़ायें साथ ही अच्छे किस्म का माल
वो जो आये थे नई राजनीति करने कीचड़ में सन गये देखते देखते। वो जो आये थे नई राजनीति करने कीचड़ में सन गये देखते देखते।
रोज-रोज उनके सामने सुबह से शाम तक करती नहीं मैं आराम। रोज-रोज उनके सामने सुबह से शाम तक करती नहीं मैं आराम।
स तरह शायद अपने क्रोध को विश्राम की अवस्था में ले जाती हैं। स तरह शायद अपने क्रोध को विश्राम की अवस्था में ले जाती हैं।
खेल में मेहनत बहुत है तो, जमे जो उसको तोड़ो ! खेल में मेहनत बहुत है तो, जमे जो उसको तोड़ो !
मोदी की गारण्टी कह सकता है देने बात तो दूर की है ! मोदी की गारण्टी कह सकता है देने बात तो दूर की है !
नहीं मिलेगा तुमको खाना जो बूढ़ों ने बच्चों को खाना लाने के लिए छोड़ दिया। नहीं मिलेगा तुमको खाना जो बूढ़ों ने बच्चों को खाना लाने के लिए छोड़ दिया।