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Sudershan kumar sharma

Romance

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Sudershan kumar sharma

Romance

लगाव

लगाव

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हर किसी से झुकाव रखो

मन में न कोई मुटाव रखो। 


क्या लेकर जाओगे इस दुनिया से,

इसलिए हरेक से लगाव रखो। 


जरूरत पड़े जब भी आपकी

वहीं अपना पड़ाव रखो। 


फिसल न जाए पांब कभी अच्छे कर्मों से,

ऐसे पांव जमाए रखो। 


छा न जाए तूफां खुदगर्जी का कभी,

ऐसा मन को समझाए रखो। 


बिछुड़ न पाओ कभी भी अपनों से,

ऐसा मन का चाव रखो। 


जब भी, मिल जाए दिल से खुंखार

कोई, अमन व चैन का सुझाव रखो। 


नफरतें अकसर खत्म करती हैं भाईचारा सुदर्शन

ऐसी आदतों से हमेशा दूरी बनाये रखो। 


अगर छूना चाहते हो आसमान की उंचाइयां

तो मुश्किलों से हर पल हमेशा लगाव रखो। 


कोई नहीं रोक सकता मंजिल से तुम्हें  सुदर्शन   

अगर सच्ची लगन व साफ सुथरा अपना स्वाभाव रखो।


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