STORYMIRROR

Dr Lalit Upadhyaya

Classics

2  

Dr Lalit Upadhyaya

Classics

लालच बुरी बला है

लालच बुरी बला है

1 min
1.3K

नोटों के लालच में

हम दौड़ रहे हैं,


रास्ते के गढ्ढे हमें

नहीं दिख रहे हैं।


लालच से बचना होगा,

जमाने के इरादे

यही कह रहे हैं।


लालच बुरी बला है,

इससे बचना ही भला है।


जमाने को इसने छला है,

बचेगा वही जिसमें कला है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics