STORYMIRROR

Sangeeta- A-Sheroes

Abstract

4  

Sangeeta- A-Sheroes

Abstract

" लाॅकडाउन "

" लाॅकडाउन "

1 min
35

सहमा सहमा डरा डरा सांस ले रहा है हर शहर

लगता है बेनाम राहों से गुजर रहा बनके कोई कहर,


बंद हो गयी जिन्दगी जंजीरों से कसी तालों में

सन्नाटा है पसरा, बस कुछ निरीह जानें ठहर गयी राहों में,


उन टूटे छप्पर पर नहीं कोई दरवाज़े

लगा पेट में ताला, पड़े अलग-थलग से सारे, 


गुजर जाएगी यह कातिल हवा, ताले भी खुल जाएंगे

जंजीरें टूट जाएं चाहे सारी

पर अब हद में जिन्दगी जीना हम सीख जाएंगे। 


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract