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Minati Rath

Abstract

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Minati Rath

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क्यों है यह दूरी

क्यों है यह दूरी

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पास हो मेरे

फिर क्यों है यह दूरी

न कोई फासला

फिर कैसी मजबूरी

क्यों हो इतने टूटे हुए

अपने ही दिल से रूठे हुए

दो जिस्म एक जान

फिर क्यों बनते हो अंजान

मेरे भी दिल हाल तो सुनो

धड़कन हो मेरे यूं बेदर्द न बनो

यह जीना नहीं मरना भी नहीं

इस हालत में मुझे रहना ही नहीं

चाहे जो भी कहो

पर कुछ तो कहो

बेरहम बनके

यूं चुप न रहो ।



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