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BINDESH KUMAR JHA

Romance Classics Inspirational

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BINDESH KUMAR JHA

Romance Classics Inspirational

क्या तुमने देखा है

क्या तुमने देखा है

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क्या तुमने देखा है

 भंवरों को फूलों से बैर करते

यह फूलों को भंवरों से डरते हैं

पानी और प्यास कि अनबन

दोनों के बीच के बिछडन


क्या तुमने नहीं देखा

कमल और नदी का प्यार

मां के आंचल बच्चों से दुलार

आसमान और पंछी के नोक-झोंक

प्रकृति और धरती का स्वर्ग लोक


चलो मैं दिखाता हूं

यह दोनों प्रेमियों को देखो

कौन भवरा कौन फूल सोचो

देखो जल में खेलती मछली

भागती देखकर है मचली


देखो कमल की मां को प्यार करते

उम्र भर गोद में हैं सवारते 

मां के आंचल में छुपा कर बैठा है

शायद मिठाई खातिर पिता से रूठा है


बंजर जमीन पर भी कुछ घास उगी है

देखो प्रकृति की ममता जाग उठी है।


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