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BINDESH KUMAR JHA

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BINDESH KUMAR JHA

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बसंत का त्यौहार

बसंत का त्यौहार

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शीत के प्रताप प्रभाव

हो रहा व्याकुल संसार,

प्रसन्नता का आयाम लेकर

आया बसंत का त्यौहार।


सो रही कलियां 

उठ रही है अंगड़ाई लेते हैं

वायु संजोए रहा है प्रकृति में

कोटि-कोटि बधाई देते


हृदय का शीतकाल तो

अनंत अवधि का लग रहा है,

हो प्रकाश और खुशबू विस्तार

हृदय में इच्छा सुलग रहा है ।


समाप्त हो मानसिक ग्रीष्म

और हृदय का शीतकाल,

बसंत मने समस्त जग में

संगीत में रहे जीवन का ताल।


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