समय
समय
1 min
3
हाँ हँसकर,
रूठकर, झगड़कर।
खुशियों से परिपूर्ण,
शीघ्र बीत जाता यह उम्र।
यह दिन जल्दी बीत जाता है,
इसकी अवधि समझ नहीं आता है।
क्या इसकी आलोचना करूं?
या फिर प्रशंसा?
जब भी यह साथ होता है,
अपने सब बन जाते हैं।
पर मेरा यह साथी मेरे अधीन नहीं,
जो मैं इसे पाबंद में रखो कहीं।
इसकी बदलते अपने साथ छोड़ देते हैं,
जीवन को एक अजनबी दिशा में मोड़ देते हैं।
थाम लो कलाई इस पल का,
कौन जानता है दिन कल का।
